Hindi Muhavare (हिंदी के मुहावरे) हिन्दी भाषा में प्रयोग होने वाले ऐसे वाक्यांश हैं, जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर किसी विशेष अर्थ का बोध कराते हैं। किसी भी भाषा में मुहावरों के प्रयोग से भाषा सरल, सरस, आलंकारिक (चमत्कारपूर्ण), प्रभावपूर्ण तथा रोचक बन जाती है।
हिन्दी के १०० प्रसिद्ध मुहावरे अलग लेख में दिए गए हैं। इस लेख में हम मुहावरों की परिभाषा, अर्थ, उत्पत्ति के आधार आदि के विषय में चर्चा करेंगे-
‘मुहावरा’ का अर्थ-
मुहावरा मूलत: अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है- बातचीत करना या उत्तर देना। कुछ बुद्धिजीवी मुहावरे को ‘रोज़मर्रा’, ‘बोलचाल’, ‘तर्ज़ेकलाम’, अथवा ‘इस्तलाह’ भी कहते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी शब्द ‘मुहावरे’ का सटीक (पूर्णतया) पर्यायवाची शब्द बनने में समर्थ नहीं है।
मुहावरे की परिभाषा-
सामान्यतया वह सुगठित शब्द-समूह, जिसका लक्षणाजन्य अथवा कभी-कभी व्यंजनाजन्य विशेष अर्थ निकलता है, मुहावरा कहलाता है।
सरल शब्दों में कहा जाए तो, ऐसा वाक्यांश जो सामान्य अर्थ का बोध न कराकर किसी विशेष अर्थ का बोध कराता है, मुहावरा कहलाता है।
मुहावरे की अन्य परिभाषाएं-
अनेक विद्वानों ने मुहावरे को परिभाषित करने की कोशिश की है। अलग अलग विद्वानों ने अलग अलग प्रकार से ‘मुहावरे’ की परिभाषा की है, जिनमें से कुछ परिभाषाएं निम्नलिखित है-
‘चैम्बर्स ट्वेन्टीथ सेंचुरी डिक्शनरी’-
इसके अनुसार, “किसी भाषा की विशिष्ट अभिव्यंजना-पद्धति को ‘मुहावरा’ कहते हैं।”
‘ऑक्सफोर्ड कन्साइज डिक्शनरी‘-
इसके अनुसार, “किसी भाषा की अभिव्यंजना के विशिष्ट रूप को ‘मुहावरा’ कहते हैं। एक अन्य पक्ष है कि विशिष्ट शब्दों विचित्र प्रयोगों एवं प्रयोग-सिद्ध विशिष्ट वाक्यांशों वाक्य-पद्धति को ‘मुहावरा’ कहते हैं।”
डॉ॰ उदय नारायण तिवारी-
“हिन्दी-उर्दू में लक्षण अथवा व्यंजना द्वारा सिद्ध वाक्य को ही ‘मुहावरा’ कहते हैं।“
ए०एस० हॉर्नबी-
ए०एस० हॉर्नबी ने ‘एडवांस लर्नर्स डिक्शनरी’ में लिखा है- “मुहावरा’ शब्दों का वह क्रम या समूह है, जिसमें सभी शब्दों का अर्थ एक साथ मिलाकर किया जाता है।“
डॉ॰ ओमप्रकाश गुप्त-
‘मुहावरा’ की सबसे अधिक व्यापक तथा सन्तोषजनक परिभाषा डॉ॰ ओमप्रकाश गुप्त ने निम्न इस प्रकार दी है :-
“प्रायः शारीरिक चेष्टाओं, अस्पष्ट ध्वनियों और कहावतों अथवा भाषा के कतिपय विलक्षण प्रयोगों के अनुकरण या आधार पर निर्मित और अभिधेयार्थ से भिन्न कोई विशेष अर्थ देने वाले किसी भाषा के गठे हुए रूढ़ वाक्य, वाक्यांश या शब्द-समूह को मुहावरा कहते हैं।“
मुहावरे का प्रयोग क्यों किया जाता है?
मुहावरे भाषा की नींव के पत्थर हैं। ये मुहावरे किसी भी भाषा को सरल, सरस, सुदृढ़, गतिशील और रुचिकर बनाते हैं। मुहावरों के प्रयोग से किसी भी भाषा में अद्भुत चित्रमयता आ जाती है। मुहावरों के बिना भाषा रोचक नहीं रहती अपितु वह निस्तेज, नीरस और निष्प्राण हो जाती है।
हिन्दी भाषा में मुहावरों का बहुत अधिक प्रचलन है। बहुत अधिक प्रचलित और लोगों के मुँहचढ़े वाक्य ‘लोकोक्ति‘ कहलाते हैं। इन वाक्यों में जनता के अनुभव का निचोड़ या सार होता है।
अन्य भाषाओं में मुहावरे का अर्थ-
यूनानी भाषा में ‘मुहावरे’ को ‘ईडियोमा’, फ्रेंच में ‘इंडियाटिस्मी’ और अंग्रेजी में ‘ईडिअम’ कहते हैं।
संस्कृत वाङ्मय में मुहावरा का समानार्थक कोई शब्द नहीं मिलता है। कुछ लोग इसके लिए ‘वाग्धारा’, ‘प्रयुक्तता’, ‘वाग्रीति’, अथवा ‘भाषा-सम्प्रदाय’ का प्रयोग भी करते हैं।
पराड़कर जी ने ‘वाक्-सम्प्रदाय’ को मुहावरे का पर्यायवाची माना है।
काका कालेलकर ने ‘मुहावरे’ के लिए ‘वाक्-प्रचार’ अथवा ‘रूढ़ि’ शब्द का सुझाव दिया है।
वी०एस० आप्टे ने अपने ग्रन्थ ‘इंगलिश-संस्कृत कोश’ में मुहावरे के पर्यायवाची शब्दों के रूप में ‘वाक्-पद्धति‘, ‘वाक् रीति’, ‘वाक्-व्यवहार’ और ‘विशिष्ट स्वरूप‘ को लिखा है।
मुहावरों की विशेषताएं-
मुहावरों की निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं–
-
- मुहावरे देश, समाज और समय के अनुसार बनते हैं।
- प्रसंग के अनुसार मुहावरों का प्रयोग किया जाता है।
- मुहावरे अपने आप में पूर्ण वाक्य नहीं होते हैं।
- मुहावरों के शब्द अपरिवर्तनीय होते हैं।
- मुहावरों का विशिष्ट अर्थ होता है न कि सामान्य।
मुहावरों का निर्माण कैसे हुआ?
मुहावरों के निर्माण के कई आधार हैं, जैसे-
|
1 |
लक्षणा का प्रयोग होने से | |
|
2 |
व्यंजना का प्रयोग होने से | |
|
3 |
अलंकारों का प्रयोग | |
|
4 |
कथानकों, किंवदन्तियों, धर्म-कथाओं आदि पर आधारित मुहावरे | |
|
5 |
व्यक्तिवाचक संज्ञाओं का जातिवाचक संज्ञाओं की भाँति प्रयोग | |
|
6 |
अस्पष्ट ध्वनियों पर आधारित मुहावरे | |
|
7 |
मनुष्येतर चैतन्य सृष्टि की ध्वनियों पर आधारित मुहावरे | |
|
8 |
जड़ वस्तुओं की ध्वनियों पर आधारित मुहावरे | |
|
9 |
लक्षणा का प्रयोग होने से | |
|
10 |
शारीरिक चेष्टाओं के आधार पर बने हुए मुहावरे | |
|
11 |
मनोवैज्ञानिक कारणों से मुहावरों की उत्पत्ति | |
|
12 |
किसी शब्द की पुनरावृत्ति पर आधारित मुहावरे | |
|
13 |
दो क्रियाओं का योग करके बनाए हुए मुहावरे | |
|
14 |
दो संज्ञाओं को मिलाकर बनाए हुए मुहावरे | |
|
15 |
हिन्दी के एक शब्द के साथ उर्दू के दूसरे शब्द का योग करके बनाए हुए मुहावरे | |
|
16 |
अन्य भाषाओं से लिए गए मुहावरे |
लक्षणा पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
लक्षणा के प्रयोग के आधार पर भी मुहावरों की उत्पत्ति हुई है। भाषा में प्रयुक्त शब्दों की तीन शक्तियां होती हैं :-
(क) अभिधा,
(ख) लक्षणा, और
(ग) व्यंजना।
(क) अभिधा-
जब किसी शब्द या शब्द-समूह का उसके शाब्दिक अर्थ (सामान्य अर्थ) में प्रयोग होता है, तब उसकी अभिधा शक्ति होती है।
अभिधा शक्ति द्वारा अभिव्यक्ति किए गए अर्थ को अभिधेयार्थ अथवा मुख्यार्थ कहते हैं।
इसे समझने के लिए आइए हम एक उदाहरण लेते हैं, जैसे– ‘शेर बनना’।
‘शेर बनना’ का सामान्य अर्थ होता है- शेर नामक चार पैरों वाला एक जानवर बनना।
(ख) लक्षणा
उपर हमने देखा कि ‘शेर बनना’ का सामान्य अर्थ है- शेर नामक एक जानवर बनना। अगर हम कहें कि अशोक शेर बन गया। अभिधा शक्ति से इसका अर्थ हुआ कि अशोक शेर नामक एक जानवर बन गया है और उसके चार पैर हो गये हैं, जो कि असम्भव है।
ऐसी स्थिति में, जब अभिधा शक्ति से अर्थ सम्भव नहीं होता, तो हम उससे सम्बन्धित दूसरे अर्थ को देखते हैं अर्थात् शेर के गुण आदि देखेंगे। शेर निडरता और बहादुरी के लिए प्रसिद्ध है। अतः ‘शेर बनना’ का अर्थ हुआ – शेर की तरह निडर और बहादुर बनना।
इस प्रकार, अशोक शेर बन गया का अर्थ हुआ- अशोक शेर की तरह निडर और बहादुर बन गया। यहांं ‘निडर और बहादुर बनना’ अर्थ जिस शक्ति से निकला है, वह लक्षणा शक्ति कहलाती है।
इसी बात को आचार्य विश्वनाथ ने ‘साहित्यदर्पण’ में इस प्रकार कहा है-
मुख्यार्थ बाधे तद्योगे यथान्योऽर्थ प्रतीयते।
रूढ़े प्रयोजनाद्वासो लक्षणा शक्तिरर्पिता।।
अर्थात् जब मुख्यार्थ के बाधित होने पर रूढ़ि (प्रसिद्धि) के कारण अथवा किसी विशेष प्रयोजन के लिए, मुख्यार्थ से सम्बन्धित किसी अन्य अर्थ का ज्ञान हो, तब जिस शक्ति के द्वारा ऐसा अर्थ प्रतीत होता है, उसे लक्षणा कहते हैं। यह शक्ति ‘अर्पित’ अर्थात् कल्पित होती है।
लक्षणा के प्रयोग से बनने वाले कुछ हिंदी मुहावरे (Hindi Muhavare) निम्नलिखित हैं-
ठहाका लगाना, आँखों में रात काटना, अंगारों पर लोटना, आँख मारना, आग से खेलना, दूध-घी की नदियां बहाना, आसमान पर दीया जलाना, चैन की बंशी बजाना, खून चूसना, विजय का डंका बजाना, लम्बी बांह होना आदि।
यह बिल्कुल मत समझना कि, क्योंकि इन हिंदी मुहावरों में लक्षणा शक्ति का प्रयोग हुआ है, इसलिए ये मुहावरे हैं। लक्षणा के समस्त उदाहरण हिंदी मुहावरे नहीं हैं। यह स्पष्ट कर देती हूं कि लक्षणा के केवल वही उदाहरण मुहावरों के अन्तर्गत आ सकते हैं, जो चिरकाल से अभ्यास के कारण रूढ़ अथवा प्रसिद्ध हो गए हैं।
व्यंजना पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
व्यंजना के प्रयोग के आधार पर भी मुहावरों की उत्पत्ति हुई है। मुहावरों में व्यंग्यार्थ भी छुपा रहता है। वह व्यंग्यार्थ किसी एक शब्द के अर्थ के कारण नहीं अपितु सभी शब्दों के श्रृंखलित अर्थों के कारण होता है, अर्थात् हम कह सकते हैं कि पूरे मुहावरे के अर्थ में छुपा रहता है।
जब अभिधा और लक्षणा अपना-अपना काम समाप्त कर लेती हैं, तब जिस शक्ति के प्रयोग से शब्द-समूह अथवा वाक्य के किसी अर्थ का बोध होता है, उसे ‘व्यंजना’ कहते हैं।
उदाहरण के लिए ‘सिर पर चढ़ना’ मुहावरे का व्यंग्यार्थ न तो ‘सिर’ पर निर्भर करता है न ‘चढ़ाने’ पर अपितु पूरे मुहावरे अर्थात् शब्द-समूह पर निर्भर होता है। इस हिन्दी मुहावरे का व्यंग्यार्थ है- ‘अनुशासनहीन, ढीठ अथवा उच्छृंखल बनना।’ यह व्यंग्यार्थ अभिधेयार्थ (मुख्यार्थ) तथा लक्षणा से अभिव्यक्त अर्थ से भिन्न होता है।
अलंकारों पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
अनेक हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare) में अलंकारों का प्रयोग मिलता है, परन्तु इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि प्रत्येक प्रत्येक अलंकारयुक्त वाक्यांश हिन्दी मुहावरा होता है। नीचे कुछ हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare) दिए गए हैं, जिनमें अलंकारों का प्रयोग हुआ है :-
-
I अर्थालंकारों पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
-
(क) सादृश्यमूलक हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)
रूपक, उपमा, अनन्वय आदि सादृश्यमूलक अलंकारों पर आधारित हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare) निम्नलिखित हैं-
-
-
- अंगार बरसाना (रूपक),
- लाल अंगारा होना (उपमा),
- सोना सोना ही है (अनन्वय),
- पैसा ही पुरुषत्व और पुरुषत्व ही पैसा है (उपमेयोपमा) आदि।
-
-
(ख) विरोधमूलक हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)
विरोधमूलक हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare) निम्नलिखित हैं-
-
-
- ऊंच-नीच देखना,
- दाएं-बाएं न देखना,
- इधर-उधर करना,
- पानी से प्यास न बुझना, आदि।
-
-
(ग) स्मृति और सन्निधिमूलक हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)
स्मृति और सन्निधिमूलक हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)निम्नलिखित हैं-
-
-
-
- दुकान बढ़ाना,
- दिया गुल होना,
- चूड़ा पहनना,
- चूड़ी तोड़ना,
- मांग-कोख से भरी-पूरी रहना, आदि।
-
-
II शब्दालंकारों पर आधारित हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)
शब्दालंकारों पर आधारित हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare) निम्नलिखित हैं-
-
-
- देर-सवेर,
- कच्चा-पक्का,
- अंजर-पंजर ढीले होना,
- आंय-वायं-शांय बकना,
- बोरिया-बिस्तर बांधना, आदि।
-
परम्परा आदि पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
कुछ हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare) विभिन्न कथानकों, किंवदन्तियों, धर्म-कथाओं आदि प्रथाओं में प्रचलित परम्पराओं पर आधारित होते हैं; जैसे—बीड़ा उठाना।
हम मध्य काल की विभिन्न कथाओं अथवा धर्म-कथाओं के काफी प्रसंगों में बीड़ा उठाने की प्रथा देखते हैं। राजा को जब कोई दुष्कर कार्य करवाना होता था, तब वह सामन्तों, वीरपुरुषों आदि को बुलाता था।
उन्हें उस दुष्कर कार्य के सम्बन्ध में सब कुछ बता दिया जाता था और एक थाली में पान रख दिया जाता था। जो वीरपुरुष उस काम को करने का दायित्व अपने ऊपर लेता था, वह थाली से बीड़ा उठा लेता था।
अतः ‘बीड़ा उठाना’ से अभिप्राय है – दायित्व अपने ऊपर लेना। यह मुहावरा कथाओं अथवा धर्म-कथाओं में प्रचलित परम्परा पर आधारित है।
कथानक आदि पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
कुछ हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare) कहानियों पर आधारित हैं, जैसे-
-
-
-
- टेढ़ी खीर होना,
- सोने का मृग होना,
- ढपोरशंख होना, आदि।
-
-
पौराणिक और ऐतिहासिक पुरुषों पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
पौराणिक और ऐतिहासिक पुरुषों के विशेष गुणों पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare) भी बने हैं, जैसे –
-
-
-
- हरिश्चन्द्र बनना,
- कुंभकरण की नींद,
- विभीषण होना,
- युधिष्ठिर बनना,
- द्रौपदी का चीर,
- जयचंद होना, आदि।
-
-
अस्पष्ट ध्वनियों पर आधारित मुहावरे
कभी कभी जब मनुष्य प्रबल भावावेश में होता है, तब उसके मुंह से कुछ अस्पष्ट ध्वनियां निकल जाती हैं। ये अस्पष्ट ध्वनियां बाद में किसी एक अर्थ में रूढ़ अथवा प्रसिद्ध हो जाती हैं और मुहावरे कहलाने लगती हैं। ऐसे कुछ भावावेशों और उनसे निकलने वाली कुछ ध्वनियों के आधार पर बने हुए मुहावरों के उदाहरण निम्नलिखित हैं :-
| भावावेश | मुहावरे | ||
| (क) | हर्ष में : | आह-हा, वाह-वाह, आदि। | |
| (ख) | दुःख में : | सी-सी करना, आह निकल पड़ना, हाय-हाय मचाना, आदि। | |
| (ग) | घृणा में : | थू-थू करना, छि-छि करना, आदि। | |
| (घ) | क्रोध में: | धत् तेरे की, उंह-हूं करना, आदि। |
पशुओं की ध्वनियों पर आधारित हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)
पशुओं द्वारा उत्पन्न आवाज पर आधारित मुहावरे भी बने हैं, जैसे-
-
-
-
- भों-भों करना,
- टर-टर करना,
- में-में करना, आदि।
-
-
पक्षी और कीट-पतंगों की ध्वनियों पर हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
पक्षी और कीट-पतंगों द्वारा उत्पन्न आवाज पर आधारित मुहावरे भी बने हैं, जैसे-
-
-
-
- कुकड़ू-कूं बोलना,
- कांव-कांव करना,
- चीं चीं करना,
- भिन्ना जाना आदि।
-
-
जड़ वस्तुओं की ध्वनियों पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare)
(क) फुस-फुस होना, फुस-फुस करना, आदि हिन्दी के मुहावरे कठोर वस्तुओं के संघर्ष से उत्पन्न ध्वनियों के अनुकरण पर आधारित हैं।
(ख) कुल-कुल करना या होना, कल-कल करना, गड़-गड़ करना, आदि हिन्दी के मुहावरे तरल पदार्थों की गति से उत्पन्न ध्वनि पर आधारित हैं।
(ग) सांय-सांय करना, सर-सराहट होना, आदि हिन्दी के मुहावरे वायु की गति से उत्पन्न ध्वनि पर आधारित हैं।
शारीरिक चेष्टाओं पर आधारित हिन्दी मुहावरे (Hindi Muhavare)
प्राणियों की शारीरिक चेष्टाएं मनोगत भा्वों को प्रकट करती हैं। अतः कुछ हिन्दी के मुहावरे शारीरिक चेष्टाओं के आधार पर भी बने हैं, जैसे-
-
-
- दांत पीसना,
- छाती कूटना या पीटना,
- नाचने लगना,
- पैर पटकना,
- पूंछ हिलाना,
- मूछों पर ताव देना,
- मुंह बनाना, आदि।
-
मनोवैज्ञानिक कारणों पर आधारित मुहावरे
मनोवैज्ञानिक कारणों से भी मुहावरों का निर्माण हुआ है, जैसे-
(क) आकस्मिक संकट पर आधारित हिंदी के मुहावरे (Hindi Muhavare), जैसे-
-
-
- कहीं का न रहना,
- आठों पहर सूली पर रहना,
- आवे का आवा बिगड़ना,
- तकदीर फूटना, आदि।
-
(ख) अतिशयोक्ति की प्रवृत्ति पर आधारित मुहावरे, जैसे-
-
-
- कलेजा बांसों उझलना,
- आसमान के तारे तोड़ना,
- खून की नदियां बहाना, आदि।
-
(ग) भाषा के अलंकरण पर आधारित मुहावरे, जैसे-
-
-
- कलेजा बांसों उझलना,
- ईद का चांद होना,
- गूलर का फूल होना,
- सरसों-सा फूलना, आदि।
-
शब्द-पुनरावृत्ति पर आधारित मुहावरे
हिन्दी भाषा में किसी शब्द की पुनरावृत्ति पर आधारित मुहावरे भी बने हैं, जैसे-
-
-
- छिप-छिप कर,
- अभी-अभी,
- थुड़ी-थुड़ी करना,
- तिल-तिल भर,
- छिः –छिः,
- थोड़ा-थोड़ा करके, आदि।
-
दो क्रियाओं के योग से बनाए हुए हिन्दी के मुहावरे
दो क्रियाओं के योग से भी हिन्दी के मुहावरे बनाए गए हैं। खाना-पीना, ओढ़ना बिछाना, उठना-बैठना, पढ़ाना-लिखना, आदि दो-दो क्रियाओं के योग से बनाए हुए हिन्दी के मुहावरे (Hindi Muhavare) हैं।
दो संज्ञाओं को मिलाकर बनाए हुए हिन्दी के मुहावरे
दो संज्ञाओं के योग से भी हिन्दी के मुहावरे बनाए गए हैं। गाजर-मूली, कपड़ा-लत्ता, चूल्हा-चौका, दवा-दारू, नदी-नाला, रोज़ी-रोटी, भोजन-वस्त्र, आदि दो संज्ञाओं को मिलाकर बनाए हुए हिन्दी के मुहावरे हैं।
हिन्दी तथा उर्दू के शब्दों को मिलाकर बनाए हुए मुहावरे
हिन्दी तथा उर्दू के शब्दों को मिलाकर भी हिन्दी के मुहावरे बनाए गए हैं। मेल-मुलाकात रखना, दान-दहेज, मेल मुहब्बत होना, दिशा-मैदान जाना, आदि हिन्दी तथा उर्दू के शब्दों को मिलाकर बनाए हुए हिन्दी के मुहावरे (Hindi Muhavare) हैं।
अन्य भाषाओं से लिए गए हिन्दी के मुहावरे
(क) संस्कृत से लिए गए हिन्दी के मुहावरे-
अर्द्धचन्द्राकार लेकर निकालना मुहावरा संस्कृत के प्रसिद्ध ग्रन्थ पंचतंत्र में प्रयोग किये गए वाक्य ‘अर्द्धचन्द्र दत्वा निस्सारिता’ का हिन्दी अनुवाद है। इसी प्रकार, ‘जले पर नमक छिड़कना’ मुहावरा संस्कृत के वाक्य ‘क्षते क्षारमिवासह्यम्’ का हिन्दी अनुवाद है।
(ख) फारसी और उर्दू से लिए गए हिन्दी के मुहावरे-
एक जान दो काबिल, काफूर हो जाना, कारूं का खजाना, कैफियत तलब करना, शीरो-शकर होना फारसी और उर्दू से लिए गए हिन्दी के मुहावरे (Hindi Muhavare) हैं।
(ग) अंग्रेजी से लिए गए हिन्दी के मुहावरे-
अंग्रेजी से से लिए गए हिन्दी के मुहावरे (Hindi Muhavare) निम्नलिखित हैं-
-
- मूर्खों का स्वर्ग : fool’s paradise
- घोड़े के आगे गाड़ी रखना : put the cart before the horse;
- ताश के महल की तरह ढह जाना : fall or collapse like a house of card;
मुहावरों में शब्दों की अपरिवर्तनीयता
हम मुहावरों में शब्दों को बदल नहीं सकते, क्योंकि अनेक मुहावरे किसी-न-किसी के अनुभव पर आधारित होते हैं। यदि उनमें किसी प्रकार का परिवर्तन अथवा उलटफेर किया जाता है, तो उन मुहावरों में समाहित अनुभव का तत्व नष्ट हो जाता है।
उदाहरण के लिए, ‘गुड़-गोबर करना’ एक हिन्दी भाषा का मुहावरा है। इसे हम ‘चीनी-गोबर करना’ नहीं कह सकते। ‘पानी जाना’ भी एक हिन्दी भाषा का मुहावरा है। इसके बदले में हम ‘जल-जल होना’ नहीं कह सकते।
इसी प्रकार, ‘गधे को बाप बनाना’ की जगह पर ‘बैल को बाप बनाना’ कहना गलत होगा। ‘मटरगश्ती करना’ के स्थान पर ‘गेहूँगश्ती करना’ अथवा ‘जौगश्ती करना’ अथवा ‘चनागश्ती करना’ तर्कसंगत नहीं है।
कुछ प्रसिद्ध हिन्दी के मुहावरे (Hindi Muhavare) निम्नलिखित हैं-
‘अ’ से आरम्भ होने वाले मुहावरे (Hindi Muhavare)-
| अपना सा मुंह लेकर रह जाना | काम न बनना। |
| अँगूठा चूमना- | खुशामद करना |
| अँचरा पसारना – | माँगना, याचना करना |
| अँधेर नगरी – | जहाँ घाँधली और अन्याय होता |
| अँधेरे घर का उजाला– | इकलौता बेटा |
| अँधेरे में तीर चलाना – | लक्ष्यविहीन प्रयास करना, अंदाजा लगाना। |
| अंक भरना- | लिपट लेना |
| अंक में समेटना– | गोद में लेना,आलिंगनबद्ध करना |
| अंकुश देना- | दबाव डालना |
| अंकुश न मानना– | न डरना |
| अंग अंग फूले न समाना- | आनंदविभोर होना |
| अंग टूटना- | बहुत थक जाना |
| अंग में अंग चुराना – | शरमाना |
| अंग-अंग खिल उठना – | खुश हो जाना। |
| अंग-अंग ढीला होना – | थक जाना |
| अंगद का पैर होना – | बिल्कुल न हिलना। |
| अंगार बनना – | लाल होना, क्रोध करना |
| अंगार बरसना – | कड़ी धूप होना। |
| अंगारे बरसना – | अत्यधिक गर्मी पड़ना |
| अंगारे सर पर धरना – | विपत्ति को मोल लेना |
| अंगारों पर पैर रखना- | अपने को खतरे में डालना, इतराना |
| अंगारों पर लोटना – | ईर्ष्या और जलन से कुढ़ना। |
| अंगारों पर लोटना – | क्रुद्ध होना |
| अंगूठा दिखाना— | देने से इंकार करना |
| अंगूठा नचाना- | चिढ़ाना |
| अंडे का शाहजादा – | अनुभवहीन |
| अंधा होना – | कुछ न सूझना। |
| अंधे के हाथ बटेर लगना– | अयोग्य को कोई महत्त्वपूर्ण वस्तु मिलना। |
| अंधेर नगरी – | कोई नियम कानून न होना। |
| अंधेरे मुँह – | प्रातः काल, तड़के |
| अंधों में काना राजा- | अज्ञनियों में अल्पज्ञान वाले का सम्मान होना |
| अक्ल का अजीर्ण होना – | आवश्यकता से अधिक अक्ल होना (व्यंग्य) |
| अक्ल का दुश्मन – | मूर्ख |
| अक्ल का दुश्मन होना – | मूर्ख होना। |
| अक्ल का पुतला- | बहुत बुद्धिमान |
| अक्ल के घोड़े दौड़ाना – | कल्पनाएँ करना |
| अक्ल के घोड़े दौड़ाना– | केवल कल्पनाएँ करते रहना |
| अक्ल चरने जाना — | बुद्धि की कमी होना |
| अक्ल दंग होना – | चकित होना |
| अक्ल पर पत्थर पड़ना – | बुद्धिभ्रष्ट होना |
| अगिया बैताल – | क्रोधी |
| अठखेलियाँ सूझना- | दिल्लगी करना |
| अड़चन डालना- | बाधा उपस्थित करना |
| अड़ियल टट्टू – | रूक रूक कर काम करना |
| अन्त पाना- | भेद पाना |
| अन्तर के पट खोलना— | विवेक से काम लेना |
| अन्दर होना– | जेल में बन्द होना |
| अन्धे की लकड़ी – | एकमात्र सहारा |
| अन्न न लगना– | खाना खाने के बाद भी मोटा न होना |
| अन्न-जल (या दाना-पानी) उठना – | जीविका रहना, रहने का संयोग न होना, तबादला या स्थान परिवर्तन होना |
| अपना उल्लू सीधा करना – | बेवकूफ बनाकर काम निकालना |
| अपना उल्लू सीधा करना – | स्वार्थ सिद्ध करना। |
| अपना घर समझना – | बिना संकोच व्यवहार |
| अपना सा मुँह लेकर रह जाना— | शर्मिन्दा होना |
| अपनी इफली आप बजाना- | अपने मन की करना |
| अपनी खिचड़ी अलग पकाना– | अलग–थलग रहना |
| अपनी खिचड़ी अलग पकाना – | सबसे पृथक काम करना |
| अपने पाँव में आप कुल्हाड़ी मारना- | जान-बूझकर आफत में पड़ना |
| अपने पैरों पर खड़ा होना – | स्वावलम्बी होना |
| अपने मुँह मिया मिट्टू बनना- | अपनी तारीफ आपने आप करना |
| अपने मुँह मियाँ मिठू बनना– | आत्मप्रशंसा करना |
| अरण्य चन्द्रिका – | निष्प्रयोजन पदार्थ |
| अरमान निकालना – | इच्छाएँ पूरी करना |
सन्दर्भ – सभी तथ्य हिन्दी साहित्य एवं व्याकरण की विभिन्न पुस्तकों, इंटरनेट पर विभिन्न वेबसाइटों जैसे – Wikipedia , Hindi NVSHQ आदि से लिये गये हैं।
